भूगोल किसे कहते है ? What is geography in hindi | भूगोल का अर्थ , परिभाषाएं , प्रकृति , तथा उद्देश्य आदि

संसार का सबसे बुद्धिमान और समझदार प्राणी मानव है।मनुष्य पृथ्वी ग्रह के व ब्रम्हांड समस्त तथ्यों के ज्ञान तथा उसके रहस्य के अनावरण के लिए सदैव जिज्ञासु एवं प्रयत्नशील रहा है। 
सृष्टि में पाये जाने वाले विविध तत्वों का अध्ययन भूगोल(Geography) के अंतर्गत किया जाता है  जो एक प्राचीन विज्ञान है। 

भूगोल (Geography):- 

भूगोल का सम्बन्ध पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों तथा उन भौतिक एवं मानवीय प्रक्रमों से है जो उन स्थानों को अन्य स्थानों से भिन्न तथा विशिष्ट बनाते हैं।
 जनसाधारण के लिये भूगोल नगरों, नदियों, पर्वतों, आदि के नामों का संग्रह मात्र है, ठीक उसी प्रकार जैसे इतिहास तिथियों का संग्रह है।
जनसंख्या की निरन्तर तीव्र वृद्धि के साथ-साथ जीवन-स्तर में वृद्धि होने के कारण पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका पर्यावरण पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हमें अपने पर्यावरण के साथ ताल-मेल बनाये रखने के लिए कठिन उपाय करने होंगे, जिसके लिए भूगोल का ज्ञान सहायक सिद्ध होगा।
तो आइये जानते हैं भूगोल के बारे में―

भूगोल का अर्थ (Meaning of Geography) :- 

भूगोल एक प्राचीन विज्ञान है, जिसके अन्तर्गत धरातल पर मिलने वाले विविध तत्वों का अध्ययन किया जाता है। प्राचीन यूनानी विद्वान इरेटोस्थनीज (Eratosthenes) ने ‘भूगोल” (Geographia) का नामकरण करते हुए इसे एक विशिष्ट विज्ञान के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। 
तत्पश्चात् हेरोडोटस (Herodotus) तथा रोमन विद्वानों स्ट्रैबो (Strabo) एवं टॉलेमी (Ptolemy) ने इसे एक सुनिश्चित स्वरूप प्रदान किया। इस प्रकार भूगोल को विकसित करने का श्रेय यूनानियों को दिया जा सकता है। 

भूगोल का शाब्दिक अर्थ:- 

भूगोल ‘भू’ और ‘गोल’ (भू + गोल) शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें ‘भू’ का अर्थ होता है ‘पृथ्वी’ और ‘गोल’ का अर्थ होता है ‘गोल'(circular)। इस प्रकार भूगोल का शाब्दिक अर्थ होता है- ‘पृथ्वी गोल’। 
भूगोल का अंग्रेजी पर्याय ‘जियोग्राफी’ (Geography) होता है। 
> Geography शब्द ग्रीक / यूनानी भाषा के दो शब्दों ‘Geo‘ (पृथ्वी) तथा ‘Graphos‘ (वर्णन करना) से मिलकर बना है। इस प्रकार इसका शाब्दिक अर्थ ‘पृथ्वी का वर्णन करना’ है। 
> Geography शब्द लैटिन भाषा के Geo (पृथ्वी) और Graphie (वर्णन करना) से बना है। इस प्रकार इसका अर्थ ‘पृथ्वी का वर्णन’ है।

भूगोल की परिभाषाएं (Definitions of Geography in hindi):- 

★ प्रसिद्ध रोमन विद्वान स्ट्रैबो ने भूगोल को परिभाषित करते हुए लिखा है ,” भूगोल हमें पृथ्वी और जल पर निवास करने वालों का बोध कराता है तथा यह जानकारी भी देता है कि पृथ्वी के विभिन्न भागों में क्या है।” 
यूनानी भूगोलवेत्ता इरेटॉस्थनीज ने सर्वप्रथम पृथ्वी के वर्णन के लिए जियोग्राफी (Geography) शब्द का प्रयोग किया। 
वर्नहार्ड वारेनियस ने भूगोल की परिभाषा दी कि ,” भूगोल पृथ्वी की सतह को अध्ययन का केंद्र मानकर  उसे समझाने वाली विधा है।” 
जर्मन दार्शनिक तथा भूगोलवेत्ता इमैनुएल कांट के अनुसार ,” भूगोल दृश्यमान परिघटनाओं का प्रतिवेदन है जो अंतरिक्ष में एक दूसरे के बाद घटित होती है।
(“Geography is a report of phenomena that occur next to each other in space”) 
फिलिप के अनुसार ,” भूगोल एक वृहत् ज्ञान रूपी वृक्ष है जिसकी जड़ें भौतिक भूगोल की मिट्टी में निहित है तथा इसकी शाखाएं माननीय क्रियाओं के प्रत्येक चरण को आच्छादित करती हैं।” 
कार्ल रिटर के अनुसार ,” भूगोल में पृथ्वी तल का अध्ययन किया जाता है जो कि मानव का निवास गृह है।”
टॉलमी के अनुसार ,” भूगोल वह आभामय विज्ञान है जो पृथ्वी की झलक स्वर्ग में देखता है।”
★ 19वीं सदी के जर्मन भूगोलवेत्ता हम्बोल्ट ने भूगोल को परिभाषित करते हुए लिखा है ,”भूगोल में पृथ्वी तल का अध्ययन मानवीय निवास के रूप में किया जाता है।” 
जर्मन भूगोलवेत्ता हेटनर के अनुसार ,” भूगोल वह क्षेत्रीय विज्ञान है जिसमें पृथ्वी तल के क्षेत्रों का अध्ययन उनकी विभिन्नताओं तथा स्थानिक संबंधों की पृष्ठभूमि में किया जाता है।” 
फ्रांसीसी विद्वान विडाल-डी-ला-ब्लॉश ने भूगोल को परिभाषित करते हुए लिखा है कि ,” भूगोल स्थलों का विज्ञान है।” 
भूगोल की और अधिक परिभाषाएं जानने के लिए यहाँ देखें👇

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भूगोल की प्रकृति:- 

भूगोल विषय आधुनिक समय में एक वैज्ञानिक प्रकृति का विषय है। इसे विभिन्न विद्वानों द्वारा विज्ञान के विषयों की श्रेणी में रखा गया है। 
गौरतलब है कि भूगोल के अंतर्गत पृथ्वी का, पृथ्वी के धरातल का, इसके स्वरूप, जलवायु, जनसंख्या, पर्यावरण, मृदा, राजनीतिक विभाजन, जल सम्पदा तथा पृथ्वी के भौतिक लक्षण आदि का अध्ययन किया जाता है। 
पृथ्वी का धरातल निरंतर परिवर्तनशील है इसीलिए भूगोल की प्रकृति के साथ साथ उसकी परिभाषा, विषय क्षेत्र तथा उद्देश्य भी निरंतर परिवर्तनयुक्त है। 
भूगोल पृथ्वी की सतह पर प्राकृतिक पक्ष तथा मानवीय पक्ष दोनों का अध्ययन किया जाता है। इन उपरोक्त दोनों क्षेत्रों में विविधताएं पाई जाती हैं। अतः भूगोल विविधताओं का अध्ययन करता है। 
प्राकृतिक विविधता में भू-आकृतियों में परिवर्तन यथा- पहाड़, पठार, मैदान, एवं जलीय पिंड (समुद्र, झील, नदी) जलवायु, वनस्पति, जंगली जीव, मिट्टी एवं खनिज पदार्थ आदि के रूप में विभिन्न स्थानों में विविधता पाई जाती है। 
     इसी प्रकार से, मानवीय पक्षों विविधता जनसंख्या के वितरण में,  उनके आर्थिक क्रियाकलापों में, सामाजिक सांस्कृतिक तत्वों जैसे कि, भोजन, वस्त्र, घरों के प्रकार, धर्म, विश्वास, रीति-रिवाजों में तथा अभिव्यक्ति के साधन जैसे, भाषा एवं बोली आदि के रूप में पाई जाती है। ये सारे तत्व क्षेत्र में परिवर्तन के साथ बदल जाते हैं।

भूगोल : (एक विज्ञान) –

भूगोल को वैज्ञानिक मान्यता प्राप्त है वैज्ञानिकों ने भूगोल को विज्ञान की श्रेणी में रखा है।
भूगोल पृथ्वी का वर्णन करने वाला विज्ञान है। यह एक ऐसा भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान है जो प्राकृतिक तथा मानवीय परिवर्तनों की व्याख्या करने वाले सामान्य नियमों तथा प्रक्रमों की खोज करता है। 
 प्रारंभ में यह नक्षत्र विज्ञान व खगोलिकी का ही एक भाग माना जाता था। किन्तु यह वर्तमान में विज्ञान का एक अलग  स्वतंत्र विषय बन चुका है। 
टॉलमी के अनुसार ,”भूगोल एक उर्ध्वपातन का विज्ञान है जो पृथ्वी का परावर्तन देखता है।”
भूगोल को आधुनिक विज्ञान के रूप में विकसित करने का श्रेय जर्मन विद्वानों को जाता है। 

भूगोल के अध्ययन का उद्देश्य:- 

भूगोल के अध्ययन का उद्देश्य दिन प्रतिदिन आवश्यक और बहुआयामी होता जा रहा है। 
इसके अध्ययन से मानव अपने निवास ग्रह अर्थात पृथ्वी की जटिल संरचना के ज्ञान से व उसके क्रियाकलापों से परिचित होता है। 
पृथ्वी के धरातल का अध्ययन करके मानव प्रादेशिक जानकारी प्राप्त करता है तथा समस्त संसाधनों का मानवहित में अधिकाधिक उपयोग कर पाता है। यही इस विषय के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य है। 
जनसंख्या के निरंतर तीव्र वृद्धि के साथ-साथ जीवन स्तर में वृद्धि होने के कारण पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है जिसका पर्यावरण पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है हमें अपने पर्यावरण के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए कठिन उपाय करने होंगे जिसके लिए भूगोल का ज्ञान सहायक सिद्ध होगा। 

निष्कर्ष:- 

इस प्रकार हम देखते हैं कि भूगोल हमारे दैनिक जीवन मे दिन प्रतिदिन बेहद उपयोगी होता जा रहा है। यह आज के समय में हमारे दैनिक जीवन के लगभग सभी क्रियाकलापों से संबद्ध हो चुका है। 
यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें पृथ्वी का तथा पृथ्वी तल का अध्ययन किया जाता है। 

धन्यवाद🙏 
आकाश प्रजापति
(कृष्णा) 
ग्राम व पोस्ट किलहनापुर, कुण्डा प्रतापगढ़
छात्र:  प्राचीन इतिहास कला संस्कृति व पुरातत्व विभाग, कलास्नातक द्वितीय वर्ष, इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय

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