Aloe vera | एलोवेरा | Aloe vera plant | एलोवेरा के विषय में ये जानकारियां आप नहीं जानते होंगे | Aloe vera in hindi

Aloe vera | एलोवेरा

 एलोवेरा (Aloe vera) , जिसे पहले घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता था , एक बेहद गुणकारी औषधीय पौधा है। इसके अनेक गुणों के कारण ही इसे आयुर्वेद में बड़ा उच्च स्थान प्राप्त है। 

एलोवेरा को आजकल लगभग सभी के घरों की शान बढ़ाते हुए बाल्कनी या दरवाजे पर देखा जा सकता है लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जिस एलोवेरा (घृतकुमारी) को आप अपने दरवाजे पर लगाये हुए हैं क्या उसके के बारे में भी आप जानते हैं ? अगर थोड़ा बहुत जानते हैं तो भी और बिल्कुल नहीं जानते तो भी आप इस पोस्ट को अंतिम तक पढ़ें। मेरा विश्वास है कि इसे पढ़कर आप कुछ न कुछ नया अवश्य जानेंगे। 

What is Aloe vera | एलोवेरा क्या है ? 

एलोवेरा बहुत सारे गुणों से परिपूर्ण एक औषधीय पौधा है। हरे रंग का यह पौधा कंटीली और गाढ़े गूदेदार पत्तियों का होता है। इस पौधे में तना नहीं होता है , अगर होता भी है तो बहुत छोटा। इसके भालाकार , मोटी मांसल पत्तियों की लंबाई लगभग 30 से 50 सेंटीमीटर तक हो सकती है। गर्मियों के मौसम में इसमें पीले रंग के फूल देखे जा सकते हैं। इसका फैलाव इसके बीच से निकलती हुई पत्तियों के बढ़ने से होता है। 

Origin of Aloe vera | एलोवेरा की उत्पत्ति 

आज एलोवेरा (Aloe vera) भले ही भारत समेत एशिया के समस्त देशों में पाया जाता है लेकिन इसकी उत्पत्ति संभवतः उत्तरी अफ्रीका में हुई थी। इसकी अनेक (लगभग 275) अलग अलग प्रजातियां आज विश्व के कई देशों में पाई जाती है। इसके गुणों की पहचान प्राचीन काल की अनेकों सभ्यताओं ने किया तथा इसे औषधीय पौधे के रूप में मान्यता दी। इसका औषधीय रूप में प्रयोग ईसा की प्रथम शताब्दी में शुरू हुआ। एलोवेरा (घृतकुमारी) के विषय में प्रारंभिक उल्लेख प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथ में मिलता है। इसके अलावा अन्य प्राचीन भारतीय ग्रंथों जैसे कि अमरकोष और भावप्रकाश में भी घृतकुमारी और उसके उपयोग संबंधी कुछ बातें वर्णित मिलती हैं।.

 

Scientific name of Aloe vera | एलोवेरा का वैज्ञानिक नाम 

एलोवेरा पादप जगत से संबंधित है । यह मैग्नोलिओफाईटा विभाग के लिलिओप्सिडा वर्ग के ऐस्पैरागलेस गण का पौधा है। इसका कुल ऐस्फोडिलसी है । इसका वंश एलो (Aloe) तथा इसकी जाति वेरा (Vera) है। इसके वंश और जाति के नाम से ही इसे एलोवेरा (Aloe vera) कहा जाता है। यही इसका द्विपद नाम (Aloe vera) है। 

एलोवेरा (Aloe vera) का वैज्ञानिक नाम Aloe Barbadensis (एलो-बार्बाडेन्सीस) है। 

Other names of Aloe vera | एलोवेरा के अन्य नाम 

एलोवेरा आज भारत , चीन , पाकिस्तान , बांग्लादेश समेत लगभग पूरे एशिया में पाया जाता है। इसके अलावा यह उत्तरी अफ्रीका , अमेरिका , ऑस्ट्रेलिया आदि स्थानों पर भी पाया जाता है। आज विश्व भर में इसकी 275 प्रजातियां मौजूद हैं। 

बता दें कि यह भिन्न भिन्न भाषाओं में अलग अलग नामों से जाना जाता है। 

 

Aloe vera names in other Languages : 

एलोवेरा के अन्य भाषाओं में नाम निम्नलिखित हैं–

सामान्य नाम : Aloe vera / घृतकुमारी

वानस्‍पतिक नाम : Aloe vera (Linn.) Burm.f.

वैज्ञानिक नाम : Aloe Barbadensis(एलो-बार्बाडेन्सीस)

English : Aloe vera , Common aloe , Barbados aloe , Musabbar , Common Indian aloe

हिन्दी : घीकुआँर , ग्वारपाठा , घीग्वार

संस्कृत : कुमारी , गृहकन्या , कन्या , घृतकुमारी

गुजराती : कुंवार , कड़वी कुंवर

कन्नड़ : लोलिसर

तमिल : कत्तालै (Kattale), अंगनी (Angani), अंगिनी (Angini)

पंजाबी : कोगर (Kogar), कोरवा (Korwa)

बंगाली : घृतकुमारी (Ghritkumari)

नेपाली : घ्यूकुमारी (Giukumari)

मराठी : कोरफड (Korphad), कोराफण्टा (Koraphanta)

मलयालम : छोट्ठ कथलाइ (Chotthu kathalai)

अरबी : तसाबार अलसी (Tasabrar alsi), मुसब्बर (Musabbar)

फ़ारसी : दरखते सिब्र (Darkhate sibre), दरख्तेसिन (arkhteesinn)

लैटिन (Latin) : Aloe vera, Aloe africana, Aloe arborescens, Aloe barbadensis

 

Aloe vera Farming | एलोवेरा की कृषि : 

 आज के समय में एलोवेरा की खेती काफी प्रचलित हो रही है। देश विदेश के अनेक क्षेत्रों में एलोवेरा की खेती के प्रति लोग आकर्षित हो रहे हैं। इसकी खेती एक अच्छे लाभ वाली खेती होती है। अर्थात एलोवेरा की खेती से अच्छा लाभ होता है। इसका कारण है इसके अनेक औषधीय गुण। औषधीय गुणों के कारण ही इसका प्रयोग अनेक प्रकार की दवाओं , सीरप , फेस वास् (Face wash) , फेस क्रीम , साबुन आदि में किया जाता है। इसी कारण इसकी बड़े पैमाने पर मांग है। 

कृषि के लिए जलवायु : 

एलोवेरा (Aloe vera) एक कैक्टस के जैसा पौधा है। यह कम वर्षा के क्षेत्रों में उगाया जाता है अर्थात इसे बहुत अधिक नमी की जरूरत नहीं पड़ती है।  इसके उत्पादन (कृषि) के लिए शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। यह उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में अधिक मात्रा में उगाया जाता है। यह अधिक शीत और हिमपात सहन नहीं कर सकता है अतः यह ठण्डे क्षेत्रों में नही पाया जाता है। ठण्डे क्षेत्रों में इसकी खेती ग्रीनहाउस (पौधाघर) में होती है। 

     इसकी कृषि के लिए भुरभुरी बलुई मिट्टी अच्छी मानी जाती है जिसमें पानी जल्द ही सोख लेता है। इसे एक सामान्य मात्रा में धूप की आवश्यकता होती है। इसे मुख्यतः गर्म आर्द्र शुष्क व उष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। 

 

■ एलोवेरा के विषय में आज आपने बहुत सी जानकारियां प्राप्त किया। यह जानकारियां अच्छी लगी हो तो इसे share करें। और किसी भी अन्य सवाल के लिए comments जरूर करें।

 इसके उपयोग और फायदे के बारे में हम अगले लेखों में बात करेंगे। 

Aloe vera uses & it’s benefits| एलोवेरा का प्रयोग और उसके फायदे : 

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Disclaimer : इस article में बताये गए सभी उपाय एक सुझाव के तौर पर हैं। यह वेबसाइट इन उपायों को लेकर कोई दावे नहीं करती है। ऐसी समस्या होने पर विशेषज्ञ (Doctor) से सलाह अवश्य लें। 

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