Bharat ki bhaugolik visheshtaen | भारत की भौगोलिक विशेषताएं | भारतीय इतिहास की भौगोलिक पृष्ठभूमि | important information for UPSC

भारत की प्राचीन सभ्यता स्पष्ट रूप से एक सीमांकित उपमहाद्वीप में उदित हुई जिसकी उत्तर दिशा को संसार की विशालतम एवं सर्वोच्च पर्वत श्रेणी हिमालय की शृंखला घेरे हुए है जो अपने पूर्वी तथा पश्चिमी विस्तारों के साथ भारत को शेष एशिया तथा संसार से पृथक करती है। Bharat ki bhaugolik visheshtaen

Bauddha dharma | बौद्ध धर्म का इतिहास | Gautam buddha history | गौतम बुद्ध का इतिहास | Biography of gautam buddha

Bauddha dharma : छठी शती ईसा पूर्व का काल धार्मिक पुनर्जागरण काल के नाम से भी जाना जाता है। वर्णव्यवस्था मे आए जटिलता, ख़र्चीले वैदिक कर्मकांड के स्वरूप, ब्राह्मणों की सर्वोच्चता को चुनौती देने वाले श्रमण परम्परा के क्षत्रिय और उन्हें मिलने वाले राजकीय संरक्षण के कारण नवीन नास्तिक संप्रदाय की उत्पत्ति हुई। जिनमें मुख्य … Read more

Hadappa sabhyata ki kala | हड़प्पा सभ्यता की कला | Harappan art in hindi | सिन्धु घाटी सभ्यता की कला | सैंधव कला और स्थापत्य

हड़प्पा सभ्यता की कला के अन्तर्गत प्रस्तर, धातु एवं मृणमूर्तियों का उल्लेख किया जा सकता है। इनके अतिरिक्त मुहरें, मनके और मृद्भाण्ड एवं लघु कलाएँ इसके सौन्दर्यबोध को इंगित करती हैं। ये कलाएँ हड़प्पा सभ्यता के लोगों की सुरुचि की परिचायिका हैं। मेसोपोटामिया और मिस्र की मूर्तिकला से सैंधव सभ्यता की मूर्तिकला की तुलना नहीं की जा सकती है, क्योंकि सैंधव सभ्यता के मूर्तिकला की उत्कृष्ट मूर्तियाँ तत्कालीन तकनीकी प्रगति की परिचायिका हैं। Hadappa sabhyata ki kala

Hadappa sabhyata | हड़प्पा सभ्यता के बारे में जानकारी | Important 35+ information about Harappan civilization in hindi

Hadappa sabhyata

◆ हड़प्पा सभ्यता (Hadappa sabhyata) भारत की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता थी।
◆ हड़प्पा सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता, सिंधु सभ्यता, सिंधु सरस्वती सभ्यता आदि नामों से जाना जाता है।
◆ हड़प्पा सभ्यता भारत, पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में फैली थी।
◆ हड़प्पा सभ्यता का सर्वाधिक विस्तार भारत के पश्चिमोत्तर भाग में था। इसका सबसे उत्तरी पुरास्थल माण्डा (जम्मू-कश्मीर), दक्षिणी पुरास्थल दैमाबाद (महाराष्ट्र), पश्चिमी पुरास्थल सुतकागेंडोर (बलूचिस्तान) तथा सबसे पूर्वी पुरास्थल आलमगीरपुर (मेरठ, उ०प्र०) था।

Jain aur baudh dharm ke uday ke karan | जैन और बौद्ध धर्म के उदय के 5 कारण | Important Reasons for the rise of Jainism and buddhism in india

Jain aur bauddh dharm ke uday ke karan

Jain aur baudh dharm ke uday ke karan : छठी शताब्दी ई०पू० का काल भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस समय न केवल भारतीय राजनीति बल्कि, धार्मिक, बौद्धिक, सामाजिक और आर्थिक क्रांतियां भी हुई। इस समय भारत में उत्तर वैदिक काल के जनपद महाजनपदों में परिवर्तित हो गए और समूचे भारत में … Read more

अतरंजीखेड़ा | Ataranjikheda | अतरंजीखेड़ा पुरास्थल की सभी जानकारियां | atranjikhera history

यह प्राचीन अतरंजीखेड़ा (Ataranjikheda) पुरास्थल उत्तर प्रदेश के एटा जिले में गंगा नदी की सहायक काली नदी के दाहिनी तट पर स्थित है। अलेक्जेण्डर कानिंघम ने सन् 1861-62 में इसी स्थान पर उत्खनन कराया था। उत्खनन के पश्चात् उन्हें विशेष प्रकार सं रंगा हुआ टीला प्राप्त हुआ था। इस टीले की पहचान अतिरंजीखेड़ा के नाम से हुई।

प्राचीन भारत के ऐतिहासिक पुरास्थल | 5 important Historical Sites of Ancient India in hindi | Ancient sites in hindi

अतरंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश में एटा जनपद में स्थित Historical sites) से गैरिक मृद्भाण्ड संस्कृति से लेकर गुप्त युग तक के अवशेष प्राप्त हुए हैं। अधिकांश अवशेष चित्रित धूसर मृद्भाण्ड संस्कृति से सम्बद्ध हैं।

क्या प्राचीन भारत में इतिहास लेखन दृष्टिकोण का अभाव था ? | Historical sense in ancient indians in hindi | Best information UPSC

डॉ० आर०सी० मजूमदार का मत है: “इतिहास लेखन के प्रति भारतीयों की विमुखता भारतीय संस्कृति का भारी दोष है। इसका कारण बताना सरल नहीं है। भारतीयों ने साहित्य की अनेक शाखाओं से सम्बन्ध स्थापित किया और उनमें से कई विषयों में विशिष्टता भी प्राप्त की, किन्तु फिर भी उन्होंने कभी गम्भीरतापूर्वक इतिहास लेखन की ओर ध्यान नहीं दिया।” Historical sense in ancient indians

Historical sources: प्राचीन भारतीय इतिहास के साहित्यिक स्रोत के रूप में जैन साहित्य का महत्व | Jain texts as a historical sources

 प्राचीन भारतीय इतिहास के ऐतिहासिक स्रोत (historical sources) के रूप में साहित्यिक स्रोत , पुरातात्विक स्रोत तथा विदेशी विवरण तीनों का सामान योगदान कहा जा सकता है। हम जानते हैं कि साहित्यिक स्रोत के अंतर्गत दो प्रकार के साहित्य आते हैं- 1. धार्मिक साहित्य ; 2. धर्मेत्तर साहित्य। धार्मिक साहित्य के अंतर्गत प्राचीन भारत के … Read more

Bauddha granth Aitihasik srot | प्राचीन भारतीय इतिहास के साहित्यिक स्रोत के रूप में बौद्ध साहित्य का महत्व | बौद्ध ग्रंथ : ऐतिहासिक स्रोत

ब्राह्मण ग्रन्थों के समान ही भारतीय इतिहास के साधन के रूप में बौद्ध साहित्य का विशेष महत्व है। सबसे प्राचीन बौद्ध ग्रन्थ त्रिपिटक हैं। इनके नाम हैं-सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभिधम्मपिटक।  Bauddha granth Aitihasik srot

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