आदिकाल का नामकरण | Hindi sahitya ke adikal ka namakaran | हिंदी साहित्य के आदिकाल के नामकरण की समस्या | आदिकाल के 7 important नाम

हिन्दी साहित्य में आदिकाल के नामकरण के सम्बन्ध में विद्वानों में जितनी मत भिन्नता दिखाई देती है उतनी किसी अन्य काल के विभाजन में नहीं दिखती। सभी विद्वानों ने अपने-अपने ढंग से उपयुक्त प्रमाणों द्वारा इस काल के नामकरण के औचित्यता को सिद्ध करने का प्रयास किया है। hindi sahitya ke adikal ka namakaran

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की इतिहास दृष्टि| Aacharya Ramchandra shukla ji ki itihas drishti

आचार्य रामचंद्र शुक्ल की इतिहास दृष्टि (Aacharya Ramchandra shukla ji ki itihas drishti) का तात्पर्य यह है कि उनके अंदर ऐतिहासिक चेतना किस प्रकार थी।  तथा वे किस प्रकार इतिहास के प्रति सजग थे। वास्तव में वे ऐसे प्रथम साहित्यकार व इतिहासकार के रूप में सामने आए हैं कि उनके सम्मुख कोई न टिक सका।  … Read more

Hindi sahityetihas lekhan me aacharya ramchandra shukla ka yogdan | आचार्य रामचंद्र शुक्ल का साहित्येतिहास लेखन परंपरा में योगदान

हिंदी साहित्य इतिहास लेखन परंपरा में आचार्य रामचंद्र शुक्ल का हिंदी साहित्य संसार सदा सदा के लिए ऋणी है। दूसरे शब्दों में कहें तो हिंदी साहित्य इतिहास लेखन परंपरा में आचार्य रामचंद्र शुक्ल का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने इस क्षेत्र में काफी ख्याति अथवा कीर्ति अर्जित की। 
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हिंदी साहित्येतिहास लेखन की परंपरा UPSC | Hindi sahitya ke itihas lekhan ki parampara | 15 ग्रंथों के आलोक में

राजनैतिक इतिहास की तरह हिंदी साहित्येतिहास लेखन की परंपरा, भारत वर्ष में नहीं थी। फिर ऐसी दशा में हिन्दी साहित्य के इतिहास की कैसे कल्पना की जा है। यद्यपि 9वीं शताब्दी तक केवल कुछ धार्मिक या साहित्यिक रचनाओं में हिन्दी साहित्य के कवियों के जीवन वृत या कृतित्व का परिचय दिया गया है। जैसे – … Read more

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